Friday, October 7, 2022

शीतयुद्ध का दौर Class 12th CH-1st Political Science [Cold War Era and Non–aligned Movement]

 


शीतयुद्ध

शीत युद्ध कोई वास्तविक युद्ध नहीं है.
बल्कि इसमें केवल युद्ध की संभावनाएं बनी रहती हैं.
इसमें संघर्ष एवं तनाव की स्थिति रहती है.
युद्ध का भय रहता है.
हमले की आशंका रहती है.
परंतु वास्तव में कोई रक्तरंजित युद्ध नहीं होता.
द्वितीय विश्व युद्ध समाप्ति के बाद से सोवियत संघ के विघटन तक.
अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच तनावपूर्ण स्थिति को शीतयुद्ध की संज्ञा दी गई.

IMPORTANT NOTES

महाशक्ति बनने की होड़
हथियारों की होड़
प्रतिस्पर्धा
विचारों की लड़ाई
वर्चस्व बनाने की होड़
पहला विश्वयुद्ध-1914 - 1918
दूसरा विश्वयुद्ध-1939 - 1945
मित्र राष्ट्र में यह शामिल -अमेरिका, फ़्रांस,
ब्रिटेन, सोवियत संघ

धुरी राष्ट्र में यह शामिल-जर्मनी, जापान,
इटली

पचिमी-जर्मनी- U.S.A
पूर्वी -जर्मनी-U.S.S.R

दो ध्रुवीय विश्व का आरंभ

दोनों महाशक्तियों ने विश्व के अलग-अलग हिस्सों पर अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया
यहीं से दो ध्रुवीयता की शुरुआत हो चुकी थी
दुनिया दो गुटों में बांटी जा रही थी
बटवारा यूरोप महाद्वीप से शुरू हुआ (बर्लिन की दीवार )
दो खेमे बन गए- पूर्वी खेमा और पश्चिमी खेमा ।
पूर्वी खेमा - सोवियत संघ (USSR )
पश्चिमी खेमा - अमेरिका ( USA )

छोटे देशो को महाशक्तियो में शामिल होने से क्या लाभ है

1) सुरक्षा का वायदा
2) आर्थिक मदद
3) सैन्य सहायता
4) हथियार

Monday, October 3, 2022

दो ध्रुवीयता का अंत- Class 12th CH-2nd Political Science [The End of Bipolarity]

 दो ध्रुवीयता का अंत- Class 12th CH-2nd Political Science [The End of Bipolarity]


सोवियत संघ का विघटन

सन् 1991 के दिसंबर महीने में।
बोरिस येल्तसिन के नेतृत्व में।
सोवियत संघ के तीन बड़े गणराज्यों ( रूस, युक्रेन, बेलारूस )
नें सोवियत संघ के समाप्त होने की घोषणा की।

सोवियत संघ


रूस में 1917 में एक क्रांति हुई।
यह क्रांति पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ थी।
इस क्रांति के बाद सोवियत संघ (USSR) अस्तित्व में आया।
सोवियत संघ 15 गणराज्य को मिलाकर बना था।
1) रूस
2) यूक्रेन
3) जॉर्जिया
4) बेलारूस
5) उज़्बेकिस्तान
6) आर्मेनिया
7) अज़रबैजान
8) कजाकिस्तान
9) किरतिस्थान
10) माल्डोवा
11) तुर्कमेनिस्तान
12) ताजीकिस्तान
13) लताविया
14) लिथुनिया
15) एस्तोनिया

सोवियत संघ की मुख्य विशेषता बताओ ?


1) विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
2) उन्नत संचार प्रणाली
3) विशाल ऊर्जा संसाधन
4) उन्नत घरेलु उपभोक्ता उद्योग
5) आवागमन की अच्छी सुविधाए
6) राज्य का स्वामित्व
7) रोजगार
8) स्वास्थ्य सुविधा

सोवियत संघ की कमियाँ और ? सोवियत संघ का विघटन के कारण ?

1) राजनीतिक आर्थिक संस्थाओ में कमजोरी.
2) संसाधनों का दुरूपयोग.
3) कम्युनिस्ट पार्टी का बुरा शासन.
4) जनता की इच्छा को पूरा करने में सरकार असमर्थ.
5) जनता को गलत जानकरी की सोवुयत संघ विकास कर रहा है.
6) कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओ को विशेष अधिकार.
7) गोर्बाचेव की सुधारो की नीति.

सोवियत संघ के विघटन के परिणाम


1) शीतयुद्ध की समाप्ति.
2) दुसरी दुनिया का पतन.
3) हथियारों की होड़ की समाप्ति.
4) अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बचा.
5) नए देशो का उदय.
6) विचारधाराओ की लडाई ख़त्म.
7) शॉक थेरेपी को अपनाया गया.
8) अन्तराष्ट्रीय आर्थिक संस्थानों का महत्त्व बढ़ा.

एकध्रुवीय विश्व


1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बचा.
अब विश्व में कोई भी देश अमेरिका को टक्कर देने वाला नहीं था.
विश्व में अमेरिकी वर्चस्व स्थापित हुआ.
अमेरिका का वर्चस्व हमें सभी क्षेत्रों में देखने को मिलता है.
जैसे.
आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक, सैन्य, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, व्यापार

अफगानिस्तान


Afghanistan.
Afghan + stan.
जनसंख्या वितरण.
पश्तून-42%
ताजिक-27%
हजारा-8%
उज्बेक-9%
भौगोलिक स्थिति.
यहां भूमि उपजाऊ नहीं है.
हिंदूकुष पहाड़ी इलाका.
रेगिस्तानी इलाका.
भूमि.
चारों ओर से भूमि से घिरा हुआ देश.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की रेखा डूरंड रेखा कहलाती है.

अफगानिस्तान में बड़े बदलाव:-


1960 के दशक में राजा जाहिर शाह ने अफगानिस्तान में कुछ सुधार किए.
जैसे:-
01)महिलाओं की शिक्षा पर ध्यान
02)चुनाव प्रक्रिया
03)जनता को राजनीतिक अधिकार

→सन् 1973 में जाहिर शाह के परिवार से ही दाऊद खान ने इनका तख्तापलट करके सत्ता हथिया ली.
→1978 में इनका भी तख्तापलट हो गया.
वहा की कम्युनिस्ट पार्टी ने शासन चलाया.
PDPA - Peoples Democratic Party Of Afghanistan.
यहां की कम्युनिस्ट पार्टी ने यहां जमीन को लेकर कुछ सुधार करने का प्रयास किया.
जिसका विरोध वहां की आम जनता ने किया.
वहां विरोध और संघर्ष बढ़ने लगे.
ऐसे में P.D.P.A ने सोवियत संघ से मदद मांगी.
PDPA - Peoples Democratic Party Of Afghanistan.

सोवियत संघ ने 1979-89 में अफगानिस्तान में हस्तक्षेप किया :-

सोवियत संघ ने 1979 में अफगानिस्तान में हस्तक्षेप किया। सोवियत संघ की व्यवस्था और भी कमजोर हुई ।
सोवियत संघ ने 24 दिसंबर 1979 में अपनी सेना को अफगानिस्तान में भेजा।
1) मुस्लिम देशों ने इसका विरोध किया.
2) अफगानिस्तान के लोगों ने इसका विरोध किया.
3) संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसका विरोध किया.
4) अमेरिका ने इसका विरोध किया.

इतने विरोध होने के बावजूद भी सोवियत संघ नहीं माना, सोवियत संघ ने अफगानिस्तान के विभिन्न शहरों को अपने कब्जे में ले लिया।

सोवियत संघ vs जनता

सभी विद्रोही इकट्ठे हो गए इन्होंने इसे धार्मिक युद्ध कहा.
इस जिहाद नाम भी दिया गया सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले मुजाहिदीन कहलाए.
सोवियत संघ के खिलाफ पाकिस्तान, अमेरिका, चीन, सऊदी अरब तथा अन्य मुस्लिम देश
.

गुरिल्ला युद्ध

गुरिल्ला युद्ध एक युद्ध की ऐसी तकनीक है, जिसमें छिपकर वार किया जाता है।
1985 में सोवियत संघ में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव मिखाईल गोर्बाचेव बने।
इन्होंने सोवियत संघ में सुधारों की नीति लागू की।
इन्होंने यहां आर्थिक राजनीतिक सुधार की नीति चलाई।
इन्होंने फैसला किया कि सोवियत संघ की सेना को बुलाया जाएगा और सोवियत संघ दूसरे देशों में अपनी सेना बेवजह नहीं भेजेगा।
1989 तक सेना वापिस बुला ली गयी।
1989 में बर्लिन की दीवार गिरा दी गई.
कई देश सोवियत संघ से अलग हो चुके थे.
1991 में सोवियत संघ बिखर चुका था
.

सोवियत संघ के विघटन के परिणाम बताइए ?

अफगान गृह युद्ध 1989-1996.
1991
 में सोवियत संघ का विघटन हो गया.
इसके बाद अफगानिस्तान में नजीबुल्लाह की सरकार गिर गई.
उत्तर के क्षेत्र में अहमदशाह मसूद का शासन चला.
तालिबान के हाथ में दक्षिण का इलाका रहा.
5 साल गृह युद्ध के बाद पूरा शासन तालिबान के साथ चला गया.
तालिबान शासन - 1996 से 2001.

तालिबान के नेता - मुल्ला उमर.
इन्होंने 5 साल शासन किया.
शरिया कानून लागू किया .
तालिबान को मान्यता पाकिस्तान ने दी.
अल-क़ायदा-ओसामा-बिन लादेन.
आतंकवादी संगठन.
तालिबान ने इस संगठन को समर्थन किया.
अमरीकी दूतावास में हमला 1998.
9/11 का हमला.

प्रथम खाड़ी युद्ध

1990 में इराक ने कुवैत पर कब्ज़ा कर लिया.

इराक को समझाया गया पर इसके बावजूद यह कब्ज़ा हटाने को नहीं माना.

फिर संयुक्त राष्ट्र संघ ने बल प्रयोग की अनुमति दी.

ये एक नाटकीय फैसला था क्योकि पिछले 45 वर्षो में UNO ने इतना बड़ा फैसला नहीं लिया था.

जोर्ज बुश ने इसे नयी विश्व व्यवस्था की संज्ञा दी.

इस युद्ध में 34 देशो के 6,60,000 सैनिको ने भाग लिया.

अमेरिकी जनरल नार्मन शवार्जकांव इस सैन्य अभियान के प्रमुख थे.

इसे Operation Desert Strom कहा गया.

इस युद्ध में स्मार्ट बमों का प्रयोग किया गया.

इसे सारी दुनिया में लाइव दिखाया गया.

इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने कहा कि यह.

“सौ जंगो की एक जंग” साबित होगी.

इराक यह युद्ध हार गया था.

इससे यह पता लगता है कि अमेरिका की सैन्य क्षमता कितनी मजबूत है.

इस युद्ध का लाइव प्रसारण किया गया.

अमेरिका ने इस युद्ध में मुनाफा कमाया.

क्योंकि अमेरिका ने इस युद्ध में जितनी रकम खर्च की थी.

उससे कहीं ज्यादा अमेरिका को जर्मनी, जापान और सऊदी अरब.

जैसे देशों से मिली.


दूसरी खाड़ी युद्ध


ईराक पर अमेरिका का हमला 19 मार्च 2003 को अमेरिका ने Operation Iraqi Freedom चलाया.

संयुक्त राष्ट्र संघ ने हमले की अनुमति नहीं दी थी.

लेकिन फिर भी अमेरिका ने हमला किया इस युद्ध में अमरीका के साथ 40 देश शामिल थे.

अमेरिका ने कहा ईराक खतरनाक जनसंहार के हथियार बना रहा है जबकि ऐसे सबूत ईराक में नहीं मिले.

हमले के उद्देश्य.

1) तेल –भण्डार , संसाधनों पर कब्ज़ा.

2) ईराक में अपनी मनपसंद सरकार बनाना


ईराक पर हमले से अमेरिकी कमजोरी नजर आई ? समझाओ?


अमेरिका अधिक ताकतवर जरूर था.

लेकिन वह इराक में कानून व्यवस्था नहीं स्थापित कर पाया.

इराकी जनता ने विरोध किया.

अमेरिका युद्ध में जीत जरूर गया.

लेकिन वहां राजनीतिक व्यवस्था बनाने में असफल रहा.


स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रकुल


सोवियत संघ के विघटन के बाद.

स्वतंत्र राष्ट्र का राष्ट्रकुल अस्तित्व में आया.

पूर्व सोवियत संघ में 15 देश शामिल थे.

इनमे से कुछ विघटन के बाद इस संगठन में शामिल हुए.

उद्देश्य-

आपसी एकता बनाए रखना.

→व्यापार नीतियों को बढ़ावा देना.

→एक दूसरे की सहायता करना.

→शांति व्यवस्था स्थापित करना.

→राष्ट्रीय सुरक्षा और निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना.


मोहम्मद बउजिजी-M.d Bouazizi कौन थे ?


मोहम्मद बउजिजी एक गरीब परिवार से थे और उनका जन्म 29 मार्च 1984 को ट्यूनीशिया में हुआ था.

ट्यूनीशिया अफ्रीका महाद्वीप में छोटा सा देश है यह जब 3 साल के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई इन्होंने अपने जीवन में अत्यधिक परिश्रम किया है, यह फल बेचते थे 10 वर्ष की उम्र में उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था.

इन्होंने टाउन हॉल के पास एक दुकान के लाइसेंस के लिए आवेदन किया हुआ था लेकिन इन्हें अनुमति नहीं मिल रही थी 17 सितंबर को जब यह अपना फल बेचने के लिए उसी जगह पर पहुंचे जहां यह फल बेचते थे लेकिन वहां पर कोई और व्यक्ति अपना सामान बेच रहा था.


 ट्यूनीशिया की तानाशाह सरकार


इसके बाद इन्होंने पुलिस से बात करने की कोशिश की लेकिन वहां की पुलिस ने इनके फल और उनका सामान छीन लिया। और इनकी बेज्जती की गई पुलिस के द्वारा और पुलिस ने इन्हें मारा पीटा भी क्योंकि वह तानाशाह सरकार थी इसके बाद इन्हें बहुत धक्का लगा और यह बहुत दुखी हुए.

इसके बाद उन्होंने गुस्से में अपने ऊपर केरोसिन छिड़का और खुद को आग लगाकर आत्मदाह लिया। इनको बचाने की कोशिश की गई पर यह बच नहीं पाए, इनके चचेरे भाई अली ने इस घटना का वीडियो बना लिया।इस घटना की वीडियो और फोटो फेसबुक के जरिए सोशल मीडिया में वायरल हो गए.

ट्यूनीशिया में तानाशाह सरकार थी। वहां का मीडिया सरकार के खिलाफ कुछ भी नहीं दिखा सकता था, वहां लोगों के साथ अत्याचार होते थे, यहां लोगों को इंसाफ नहीं मिलता था। लेकिन इस घटना ने यहां क्रांति ला दी। फोटो दुनिया के विभिन्न देशों में वायरल हो चुके थे.


President :- Zine El Abidine Ben Ali


4 जनवरी 2011 को इनकी मृत्यु हो गई।इनके अंतिम संस्कार में हजारों आम लोग शामिल हुए थे। यहां के राष्ट्रपति (Zine El Abidine Ben Ali) थे इंका शासन लगभग 1987 से चल रहा था इनके शासन में बहुत भ्रष्टाचार था.


ट्यूनीशिया में विद्रोह


मोहम्मद बौउजिजी की मृत्यु के बाद ट्यूनीशिया में लोगों ने भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। ट्यूनीशिया की सरकार ने उनके विरोध को दबाने के लिए लोगों पर गोलियां भी चलाने के आदेश दिए, राष्ट्रपति ने यह सोचा कि लोगों को डरा कर उनके प्रदर्शन को रोका जा सकता है.

लेकिन लोगों ने प्रदर्शन को नहीं रोका रोजाना प्रदर्शन में लोगों की संख्या बढ़ने लगी थी बहुत सारे लोगों ने हड़ताल शुरू कर दिया था जनता ने अपने रोजगार पर जाना बंद कर दिया था और सभी लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे थे.

ट्यूनीशिया की सरकार ने भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए देश में कर्फ्यू लगा दिया. ट्यूनीशिया में आपातकाल लगाना ही एकमात्र रास्ता बच गया था। बेन अली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

बेन अली का भारी विरोध हुआ ट्यूनीशिया की सेना ने भी बेन अली का साथ नहीं दिया और बेन अली का शासन खत्म हो गया.


अरब स्प्रिंग कहां कहां फैल गया ?

ट्यूनीशिया के बाद यह विद्रोह अन्य अफ्रिका तथा मध्य एशिया देशों में फैल गया:

1) मोरक्को

2) लीबिया

3) अल्जीरिया

4) जॉर्डन

5) इराक

6) सऊदी अरब

7) ओमान

8) बहरीन

9) इजिप्ट

10) सूडान

11) यमन

12) सीरिया इत्यादि.


 अरब स्प्रिंग के उद्देश्य :-

1) तानाशाही को समाप्त करके लोकतंत्र लाना.

2) मानव अधिकार का हनन रोकना.

3) गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार से जनता निजात पाना.

4) राजतंत्र समाप्त करना.

5) सम्मानपूर्वक जीवन.

अरब स्प्रिंग के परिणाम :- 

अरब क्रांति सफल नहीं हुई.

केवल ट्यूनीशिया में लाभ हुआ.

लीबिया और सीरिया तब हो गए.

कुछ देशों में सैनिक शासन मजबूत हुआ.

सऊदी अरब ने स्थिति को संभाला.







वैश्वीकरण- Class 12th CH-6th Political Science - Globalization

 

वैश्वीकरण- Class 12th CH-6th Political Science - Globalization




वैश्वीकरण का अर्थ क्या है ?

वैश्वीकरण का अर्थ है :- प्रवाह। प्रवाह कई तरह का हो सकता है :-
1-विचारो का एक हिस्से से दुसरे हिस्से में पहुच जाना
2-वस्तुओ का एक से अधिक देशो में पहुचना
3-पूँजी का एक से ज्यादा जगह पर पहुचना
4-बेहतर आजीविका की तलाश में लोगो की एक देश से दुसरे देश में आवाजाही

वैश्वीकरण के कारण


1) प्रोद्योगीकी.
2) टेलेफोन, टेलीग्राफ का आविष्कार.
3) मुद्रण तकनीक ( छपाई तकनीक )

वैश्वीकरण एक बहु आयामी अवधारणा है.
इसके राजनीतिक, आर्थिक, सामजिक परिणाम होते है.

वैश्वीकरण के राजनैतिक परिणाम


सरकार की नीतियों, कार्यो, भूमिका में बदलाव आया है.
उद्योगों में सरकार कम हस्तक्षेप करती है.
अब सरकार कल्याणकारी राज्य की धारणा से हटकर न्यूनतम हस्तक्षेप वाली नीति अपना रही है.
सरकार के पास उच्च तकनीक आ रही है.
जिसके द्वारा सरकारे नागरिको पर नियंत्रण बना रही है.
राज्य अब कुछ कामो तक अपने को सीमित रखता है.
जैसे – कानून औए व्यवस्था बनाना, नागरिको को सुरक्षा देना
राज्य अब भी ताकतवर है.

वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव


  1. खान–पान में बदलाव।
  2. रहन सहन में बदलाव।
  3. संस्कृतियों का हास हो रहा है।
  4. अमेरिकी संस्कृतियों की तरफ झुकाव बढ़ रहा है।
  5. महिलाओं की स्थिति में कमी तथा सुधार।
  6. विदेशी फिल्मों, त्योहारों, संगीत का रुझान बढ़ रहा है।
  7. रूढ़िवादिता खत्म हो रही है।
  8. विदेशी संस्कृति का प्रसार हुआ है।
  9. लोगों के विचारों में बदलाव आ रहा है।
  10. देश अपनी वीजा नीति कठोर बना रहे हैं।
  11. निजीकरण और पूँजीवाद को बढ़ावा मिल रहा है।
  12. लाखो लोगो को रोजगार मिल रहा है।
  13. बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
  14. बाजार में विभिन्न देशों के उत्पाद आसानी से उपलब्ध है।

वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव


मुक्त व्यापार बढ़ रहे है .
आयात से प्रतिबन्ध हटाये जा रहे है.
पूंजीवादी देशो को लाभ हो रहा है.
विकसित देश अपनी वीजा नीति कठोर बना रहे है.
निजीकरण और पूँजीवाद को बढ़ावा मिल रहा है.
लाखो लोगो को रोजगार मिल रहा है.
बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है.
बाजार में विभिन्न देशों के उत्पाद आसानी से उपलब्ध है.

भारत और वैश्वीकरण

विश्व में तथा भारत में वैश्वीकरण का इतिहास बहुत पुराना रहा है.
भारत बनी बनाई वस्तुओं का आयातक और कच्चे माल का निर्यातक था.
भारत ने आजादी के बाद से यह फैसला लिया की हम दुसरे देशों पर निर्भरता ख़त्म करेंगे.
भारत ने संरक्षणवाद की नीति अपनाई और अपने देश के उत्पादकों को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया.
इससे कुछ क्षेत्रों में तरक्की हुई तो कुछ क्षेत्र डूब गए.
भारत बाकी देशों की तुलना में पिछड़ गया.
1991 में वित्तीय संकट से उबरने के लिए नई आर्थिक नीति अपनाई गई.
व्यापार की बाधाएं खत्म कर दी गई.
जिससे भारत को लाभ हुआ.
इस प्रकार से हम कह सकते हैं.
कि वैश्वीकरण से विकासशील देशों को लाभ हुए हैं.

वैश्वीकरण का विरोध

पूरी दुनिया में वैश्वीकरण की आलोचना हो रही है।
वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों तरह के लोगो ने इसका विरोध किया है।
→वामपंथी कहते है :- मौजूदा वैश्वीकरण पूँजीवाद की एक ख़ास व्यवस्था है।
यह धनी को धनी और गरीब को और गरीब बना रही है तथा राज्य कमजोर हो रहा है।
राज्य अब गरीबों के हितों की रक्षा नहीं कर पाता है.

→वैश्वीकरण के दक्षिणपंथी आलोचक कहते हैं.
इससे राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक प्रभाव पर बुरे पड़ रहे हैं.
1) वैश्वीकरण से बुरे सांस्कृतिक प्रभाव पड़े है.
2) लोग अपनी सदियों पुरानी संस्कृति को खो रहे है.
3) वैश्वीकरण विरोधी आन्दोलन सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरे विश्व में हो रहे है.
4) वैश्वीकरण के विरोध के लिए एक मंच WSF बनाया गया है.
5) इस मंच के तहत मानवाधिकार कार्यकर्ता, पर्यवारणवादी, मजदूर, युवा, महिला कार्यकर्त्ता एकजुट हुए है।

( WSF – World Social Forum )
1) WSF पहली बैठक – 2001 में ब्राजील
2) WSF चौथी बैठक - 2004 में मुंबई

GAURISH PANDEY
( CO-FOUNDER OF EKLAVYA COACHING INSTITUTE )



Sunday, October 2, 2022

संयुक्त राष्ट्र संघ और इसके संगठन- Class 12th CH-5th Political Science United Nations And Its Organizations

 

संयुक्त राष्ट्र संघ और इसके संगठन- Class 12th CH-5th Political Science United Nations And Its Organizations








संयुक्त राष्ट्र संघ


यह एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है.

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई.

भारत इसका सदस्य 30 अक्टूबर 1945 को बना.

संयुक्त राष्ट्र संघ की वर्तमान सदस्य संख्या 193 देश हैं.



संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक

संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर पर 50 देशों के हस्ताक्षर हुए। पोलैंड 51वा देश था। इस तरह संयुक्त राष्ट्र संघ में 51 मूल संस्थापक सदस्य हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी ?

प्रथम विश्व युद्ध 1914-1918 ने दुनिया को इस बात के लिए जगा दिया की झगड़ों के निपटारे के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय संगठन जरूर होना चाहिए! 
इसके बाद लीग ऑफ नेशंस का जन्म हुआ! 
शुरुवात में यह संगठन कामयाब रहा! 
लेकिन यह दूसरा विश्व युद्ध 1939-45 को नहीं रोक सका! 
ऐसे में एक बार फिर आवश्यकता पड़ी! 
कि कोई एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय संगठन होना चाहिए! 
जो दुनिया के विभिन्न देशों के झगड़ों का निपटारा कर सकेऔर विभिन्न देशों को एक साथ एक मंच पर ला सकें! 
ऐसे में लीग ऑफ नेशंस के उत्तराधिकारी के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई! 

संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य

  1. अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना।
  2. राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना।
  3. अगर विभिन्न देशों के बीच में युद्ध छिड़ गया हो तो दुश्मनी को कम करना।
  4. सामाजिक आर्थिक विकास।
  5. विभिन्न देशों की सहायता करना।

संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना / अंग

1) सुरक्षा परिषद
2) अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय
3) सचिवालय
4) आम सभा
5) आर्थिक और सामाजिक परिषद
6) न्यासिता परिषद

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते है।
5 सदस्य स्थाई होते है।
10 सदस्य अस्थाई  होते हैं जो प्रत्येक 2 वर्ष के बाद बदल दिए जाते हैं
इन सदस्यों का चुनाव आम सभा द्वारा होता है.

उद्देश्य

शांति और सुरक्षा बनाए रखना.
अनिवार्य निर्णय को घोषित करने का अधिकार

आम सभा

एकमात्र ऐसी संस्था जिसमें प्रत्येक सदस्य को 1 वोट हासिल है.
सभी को समानता है.
हर वर्ष सम्मेलन होता है.
महासभा संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा पत्र में आने वाले समस्त विषयों पर विचार करती है.
विवाद का मंच.

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय नीदरलैंड के हेग में स्थित है।
1980 तक अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का काफी कम प्रयोग किया गया।
इसके बाद से विकाशील देशों ने इसका प्रयोग शुरू किया.
अंतर्राष्ट्रीय विवादों का समाधान किया जाता है.
इसमें 15 न्यायाधीशों का चुनाव 9 वर्ष के लिए.
आम सभा और सुरक्षा परिषद दोनों में पूर्ण बहुमत द्वारा होता है.

सचिवालय

अन्य प्रमुख संगठनों के कार्य के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टाफ।
इसका प्रमुख महासचिव होता है.
जिसकी नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सलाह पर आम सभा 5 सालों के लिए करती हैं।

आर्थिक और सामाजिक परिषद

सदस्य - 54.
सदस्य देशों का चुनाव आम सभा 3 साल के लिए करती है.
सभी भौगोलिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व हो.
इस प्रकार सदस्य का चुनाव.

न्यासिता परिषद

इसका उद्देश्य दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पराजित देशो की संपत्ति को लौटाना था.
इन देशों की अर्थव्यवस्था में सुधार का प्रयास करना.
इसमें 11 देशों को रखा गया था.
1994 के बाद इसे समाप्त कर दिया गया.

UNESCO :-
United Nations educational scientific and cultural organization 
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन

स्थापना –16 नवंबर 1945
4 नवंबर 1946
सदस्य - 193
मुख्यालय-पेरिस (फ्रांस )
उद्देश्य –
शिक्षा, विज्ञान, समाज तथा मानव विज्ञान, संस्कृति, संचार को उन्नत बनाना.
युनेसको द्वारा सदस्य देशों के मध्य साक्षरता का प्रसार.
तकनीकी और शैक्षिक प्रशिक्षण तथा स्वतंत्र मीडिया के प्रचार के लिए कार्य किए गए हैं.
युनेसको विश्व में कुछ स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित करता है.
अद्भुत औरयूनिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व इत्यादि.
भारत की लगभग 38 स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है
उदाहरण –
आगरा किला, अजंता गुफा, सूर्य मंदिर इत्यादि।

UNICEF :-
United Nations children fund.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष.

सदस्य -193
स्थापना– 1946
मुख्यालय (न्यूयॉर्क ) USA

उद्देश्य या कार्य।

यह विश्व भर में बच्चों के कल्याण कार्य में लगा हुआ है.
बच्चों के विकास के लिए कार्य करता है.
बच्चों के स्वास्थ्य तथा उत्तम जीवन को सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है.

I.L.O :-
International labour organization 
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन

सदस्य - 187
स्थापना – 1919
मुख्याला-जेनेवा (स्विट्ज़रलैंड).
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ( I.L.O )

उद्देश्य या कार्य:-

श्रमिकों की सहायता करना अंतर्राष्ट्रीय मानकों के द्वारा वैश्विक स्तर पर श्रमिको के लिए कार्य करना.
कार्य स्तर पर सुरक्षा ,समता, स्वाभिमान की स्थिति बनाना.
महिला तथा पुरुष श्रीमको को उत्पादन कार्य में संलग्न करने के लिए प्रोत्साहन देना.
बलात श्रम तथा भेदभाव से मजदूरों को बचाना.
संयुक्त राष्ट्रसंघ की कई शाखाएं और एजेंसियां है। सदस्य देशों के बीच युद्ध और शांति तथा विरोध पर आम सभा में भी चर्चा होती है और सुरक्षा परिषद में भी सामाजिक आर्थिक मुद्दों से निपटने के लिए कई एजेंसियां है जिनमें शामिल है.
WHO :- World Health Organization 
UNDP :- United Nations Development Program 
UNHRC :- United Nations Human Right Council 
UNHCR :-. United Nations High Commissioner for Refugees 
UNICEF :- United Nations International Children's Emergency Fund
UNESCO :- United Nations Educational, Social and Cultural Organization 

बीच युद्ध और शांति तथा विरोध पर आम सभा में भी चर्चा होती है और सुरक्षा परिषद में भी सामाजिक आर्थिक मुद्दों से निपटने के लिए कई एजेंसियां है जिनमें शामिल है.
WHO
UNDP
UNHRC
UNHCR
UNICEF
UNESCO

W.H.O (World health organization - विश्व स्वास्थ्य संगठन)

स्थापना – 7 अप्रैल 1948.
सदस्य - 194.
मुख्याला-जेनेवा (स्विट्ज़रलैंड).
भारत इसमें 1948 से ही शामिल गई.
यह संगठन विश्व भर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करता है.
विश्व भर में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना.
विश्व भर के देश इसमें अपना योगदान करते है.
विश्व के लोगों के स्वास्थ्य स्तर को ऊंचा करना.
इसके 6 क्षेत्रीय कार्यालय है.
इसमें से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का चित्र कार्यालय नई दिल्ली में है.
डब्ल्यूएचओ ने भारत में.
चेचक, पोलियो, संक्रामक रोग तथा.
विभिन्न प्रकार के टीके और दवाइयां उपलब्ध कराने में योगदान दिया है.
United Nations And It's Organization's
Principal organs, key agencies: UNESCO,UNICEF,WHO,ILO, Security council and the need for its expansion.

सुरक्षा परिषद और इसमें विस्तार की आवश्यकता


संयुक्त राष्ट्रसंघ तथा सुरक्षा परिषद द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बने हैं.
सुरक्षा परिषद में सदस्यों की संख्या में आज तक कोई बदलाव नहीं हुआ है.
लेकिन वर्तमान समय में विश्व में बहुत से बदलाव देखने को मिल रहे हैं.
ऐसे में कई बार सुरक्षा परिषद के स्थाई तथा अस्थाई सदस्यों को बढ़ाने की मांग उठी है.
एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के ज्यादा देशों को सुरक्षा परिषद में सदस्यता देने की बात उठी है.
सुधार होने चाहिए इस सवाल पर सभी सहमत हैं.
लेकिन सुधार कैसे किया जाए इसका समाधान नहीं मिला.
1992 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा में एक प्रस्ताव पारित हुआ

जिसमें तीन मुख्य शिकायतों का जिक्र हुआ :-

सुरक्षा परिषद अब राजनीतिक वास्तविकता की नुमाइंदगी नहीं करती.
सुरक्षा परिषद के फैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है। 
इनके फैसलों पर चंद देशों का दबदबा होता है।

सुरक्षा परिषद में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है।

→→→→→


1997 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव कोफी अन्नान ने जांच शुरू करवाई कि सुधार किस प्रकार किया जाए,
अगर नए सदस्य सुरक्षा परिषद में चुने जाएं तो किस प्रकार चुने जाएं.
इसके बाद कुछ सालों में सुरक्षा परिषद के स्थाई और अस्थाई सदस्यता के लिए नए मानदंड सुझाए गए जो इस प्रकार हैं.
1) बड़ी आर्थिक ताकत.
2) बड़ी सैन्य ताकत.
3) संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में योगदान.
4) आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र.
5) ऐसा देश जो लोकतंत्र और मानव अधिकारों का सम्मान करता हो.
6) ऐसा देश जो अपने भूगोल अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिहाज से
7) विश्व की विविधता की नुमाइंदगी करता हो।
(For most important questions open this link)
GAURISH PANDEY
( CO-FOUNDER OF EKLAVYA COACHING INSTITUTE )



India's Role in the Global World

 India's Role in the Global World Introduction: India, the world's largest democracy and a vibrant, diverse nation, plays a pivotal ...