शीतयुद्ध
शीत युद्ध कोई वास्तविक युद्ध नहीं है.
बल्कि इसमें केवल युद्ध की संभावनाएं बनी रहती हैं.
इसमें संघर्ष एवं तनाव की स्थिति रहती है.
युद्ध का भय रहता है.
हमले की आशंका रहती है.
परंतु वास्तव में कोई रक्तरंजित युद्ध नहीं होता.
द्वितीय विश्व युद्ध समाप्ति के बाद से सोवियत संघ के विघटन तक.
अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच तनावपूर्ण स्थिति को शीतयुद्ध की संज्ञा दी गई.
IMPORTANT NOTES
महाशक्ति बनने की होड़
हथियारों की होड़
प्रतिस्पर्धा
विचारों की लड़ाई
वर्चस्व बनाने की होड़
पहला विश्वयुद्ध-1914 - 1918
दूसरा विश्वयुद्ध-1939 - 1945
मित्र राष्ट्र में यह शामिल -अमेरिका, फ़्रांस,
ब्रिटेन, सोवियत संघ
धुरी राष्ट्र में यह शामिल-जर्मनी, जापान,
इटली
पचिमी-जर्मनी- U.S.A
पूर्वी -जर्मनी-U.S.S.R
दो ध्रुवीय विश्व का आरंभ
दोनों महाशक्तियों ने विश्व के अलग-अलग हिस्सों पर अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया
यहीं से दो ध्रुवीयता की शुरुआत हो चुकी थी
दुनिया दो गुटों में बांटी जा रही थी
बटवारा यूरोप महाद्वीप से शुरू हुआ (बर्लिन की दीवार )
दो खेमे बन गए- पूर्वी खेमा और पश्चिमी खेमा ।
पूर्वी खेमा - सोवियत संघ (USSR )
पश्चिमी खेमा - अमेरिका ( USA )
छोटे देशो को महाशक्तियो में शामिल होने से क्या लाभ है
1) सुरक्षा का वायदा
2) आर्थिक मदद
3) सैन्य सहायता
4) हथियार
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